सांता का दफ्तर

एक दिन संता अपने दफ्तर पहुँचता है तो बनता उसकी सूजी हुई आँखें देख कर उससे पूछता है!
बंता: ओये, संता तेरी आँखों को क्या हुआ ये इतनी सूजी हुई कैसे हैं!”
संता: कुछ नहीं यार कल मैं फिल्म देखने गया था तो मध्यकाल में जब मेरी आगे वाली सीट पर बैठी हुई महिला उठी तो मैंने देखा की उसकी पोशाक उसके नितम्बों के बीच में फसी हुई है , यह देख मैंने उसकी पोशाक को बहार निकाल दिया, बस फिर क्या था उसने पलट कर मेरी आँख पर घूंसा मारा और वो सूज गयी!”
बंता: तो फिर तेरी दूसरी आँख को क्या हुआ!
संता : कुछ नहीं यार घूँसा खाने के बाद मैंने सोचा की वह शायद अपनी पोशाक को नितम्बों के बीच ही रखना चाहती है, तो इसीलिए मैंने उसे फिर से ऊँगली से अन्दर कर कर दिया!”

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